Tuesday, June 16, 2026

करुणाकरं जगदीश्वरम्

                                                  




                                                       


                                                        

करुणाकरं जगदीश्वरम्

                                                       जय शंभूनाथ दिगम्बरम्  जय शंभूनाथ दिगम्बरम्

करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्
भवतारणं भयहारणम्  भवतारणं भयहारणम्
करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्

मृगछाल अंग सुशोभितम्  करमाल दण्ड विराजतम्
मृगछाल अंग सुशोभितम्  करमाल दण्ड विराजतम्
यमकाल पाशविमोचकम्  यमकाल पाशविमोचकम्
करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्

गलमुण्डमाल कपालब्याल  तनभस्म शोभित सुन्दरम् 
गलमुण्डमाल कपालब्याल  तनभस्म शोभित सुन्दरम् 
तव शक्ति अंग सुशोभितम्  तव शक्ति अंग सुशोभितम्
जय शंभूनाथ दिगम्बरम् जय शंभूनाथ दिगम्बरम्
करुणाकरं जगदीश्वरम् करुणाकरं जगदीश्वरम्

हे दक्षयज्ञ विनाशकम् हे कामदाहन कारणम्
हे दक्षयज्ञ विनाशकम् हे कामदाहन कारणम्
श्री गणेश स्कंद नमस्कृतम्  श्री गणेश स्कंद नमस्कृतम्
करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्

हे आशुतोष शशांकशेखर चंद्रमौलिमृतुंज्जयम्
हे आशुतोष शशांकशेखर चंद्रमौलिमृतुंज्जयम्
तवपादकमल नवाम्हम्, तवपादकमल नवाम्हम्,
करुणाकरं जगदीश्वरम् करुणाकरं जगदीश्वरम्

जय शंभूनाथ दिगम्बरम्  जय शंभूनाथ दिगम्बरम्
करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्
भवतारणं भयहारणम्  भवतारणं भयहारणम्
करुणाकरं जगदीश्वरम्  करुणाकरं जगदीश्वरम्

Monday, June 15, 2026

Rudrastam with Hindi meaning

 




                            रुद्राष्टकम

       

 

                                  नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
                                 विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
                                  निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
                                 चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्

हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो निष्पक्ष हैं जिनका आकार आकाश के समान हैं जिसे मापा नहीं जा सकता उनकी मैं उपासना करता हूँ |

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्

जिनका कोई आकार नहीं, जो के मूल हैं, जिनका कोई राज्य नहीं, जो गिरी के वासी हैं, जो कि सभी ज्ञान, शब्द से परे हैं, जो कि कैलाश के स्वामी हैं, जिनका रूप भयावह हैं, जो कि काल के स्वामी हैं, जो उदार एवम् दयालु हैं, जो गुणों का खजाना हैं, जो पुरे संसार के परे हैं उनके सामने मैं नत मस्तक हूँ |

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा

जो कि बर्फ के समान शील हैं, जिनका मुख सुंदर हैं, जो गौर रंग के हैं जो गहन चिंतन में हैं, जो सभी प्राणियों के मन में हैं, जिनका वैभव अपार हैं, जिनकी देह सुंदर हैं, जिनके मस्तक पर तेज हैं जिनकी जटाओ में लहलहारती गंगा हैं, जिनके चमकते हुए मस्तक पर चाँद हैं, और जिनके कंठ पर सर्प का वास हैं |

 

 

 

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

जिनके कानों में बालियाँ हैं, जिनकी सुन्दर भौंहें और बड़ी-बड़ी आँखे हैं जिनके चेहरे पर सुख का भाव हैं जिनके कंठ में विष का वास हैं जो दयालु हैं, जिनके वस्त्र शेर की खाल हैं, जिनके गले में मुंड की माला हैं ऐसे प्रिय शंकर पुरे संसार के नाथ हैं उनको मैं पूजता हूँ |

 

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्

जो भयंकर हैं, जो परिपक्व साहसी हैं, जो श्रेष्ठ हैं अखंड है जो अजन्मे हैं जो सहस्त्र सूर्य के सामान प्रकाशवान हैं जिनके पास त्रिशूल हैं जिनका कोई मूल नहीं हैं जिनमे किसी भी मूल का नाश करने की शक्ति हैं ऐसे त्रिशूल धारी माँ भगवती के पति जो प्रेम से जीते जा सकते हैं उन्हें मैं वन्दन करता हूँ |

 

 

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

जो काल के बंधे नहीं हैं, जो कल्याणकारी हैं, जो विनाशक भी हैं,जो हमेशा आशीर्वाद देते है और धर्म का साथ देते हैं , जो अधर्मी का नाश करते हैं, जो चित्त का आनंद हैं, जो जूनून हैं जो मुझसे खुश रहे ऐसे भगवान जो कामदेव नाशी हैं उन्हें मेरा प्रणाम |

 

 

 

यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्
तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं

जो यथावत नहीं हैं, ऐसे उमा पति के चरणों में कमल वन्दन करता हैं ऐसे भगवान को पूरे लोक के नर नारी पूजते हैं, जो सुख हैं, शांति हैं, जो सारे दुखो का नाश करते हैं जो सभी जगह वास करते हैं |

 

जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

मैं कुछ नहीं जानता, ना योग, जप ही पूजा, हे देव मैं आपके सामने अपना मस्तक हमेशा झुकाता हूँ, सभी संसारिक कष्टों, दुःख दर्द से मेरी रक्षा करे. मेरी बुढ़ापे के कष्टों से से रक्षा करें | मैं सदा ऐसे शिव शम्भु को प्रणाम करता हूँ |

 

                     नमः शिवाय

करुणाकरं जगदीश्वरम्

                                                                                                                                            ...